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महंगाई से त्रस्त पूरी दुनिया- self reliance india


महंगाई से त्रस्त पूरी दुनिया

       इस समय केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरा विश्व कमोवेश महंगाई की चपेट में है। इस महंगाई की सबसे ज्यादा मार गरीबों व निम्न मध्यम वर्ग पर पड़ रही है, क्योंकि एक तरफ जहां कोरोना की वजह से उनके या तो रोजगार छिन गए हैं या आय में कमी आई है, तो वही महंगाई नीम पर करेला सावित हो रही है। आम लोगों के साथ-साथ यह महंगाई वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने भी बड़ी चुनौती के रूप में सामने है। भारत में थोक महंगाई दर नवंबर के महीने में बढ़कर 14.23 फीसदी तक पहुंच गई जो अप्रैल 2005 के बाद सबसे ज्यादा है। ठीक एक वर्ष पहले यानी नवंबर 2020 में देश में थोक महंगाई दर महज 2.29 फीसदी थी। विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका में भी महंगाई दर नवंबर महीने में 6.8 फीसदी के स्तर तक पहुंच गई। वर्ष 1982 के बाद अमेरिका में महंगाई दर में यह सबसे बड़ी तेजी है। ब्रिटेन में भी महंगाई फिलहाल पिछले 10 वर्षों के उच्चतम स्तर (5.1 फीसदी) पर है।

कोरोना के मद्देनजर लगे लॉकडाउन के हटने के बाद एक तरह मांग में भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिसे हम पेंट-अप डिमांड (बढ़ी हुई मांग) भी कहते हैं, वहीं दूसरी तरफ लॉकडाउन हटने के बाद भी कुछ हद तक प्रतिबंध लगे हुए हैं। इससे आपूर्ति पूरी तरह से बहाल नहीं हो पाई है। इन दिनों महंगाई की सबसे बड़ी वजह यही है। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सिस्टम में पर्याप्त नकदी / इंजी मनी उपलब्ध कराई जा रही है। उसकी वजह से भी कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है।

इन 5 वजहों से अधिकांश देशों में बढ़ रही है महंगाई

1. बनी हुई है कामगारों है की भारी किल्लत      
      
         कामगारों की किल्लत अभी भी देखी जा रही है। उदाहरण के तौर पर इस वजह से मलेशिया में पाम ऑयल का उत्पादन प्रभावित हो रहा है जो इसकी कीमतों में बढ़ोतरी के लिए काफी हद तक जिम्मेदार है। पाम ऑयल की कीमतों में तेजी से एफएमसीजी के उत्पादों मसलन साबुन, तेल, शैंपू बिस्कुट, कॉस्मेटिक्स, नमकीन आदि के दामों में बढ़ोतरी हुई है, क्योंकि इन उत्पादों के निर्माण में पाम ऑयल का इस्तेमाल होता है।  

2. क्रूड ऑयल में तेजी से कई उत्पाद महंगे

           कूड ऑयल में तेजी की वजह से ट्रांसपोर्ट/लॉजिस्टिक / डिलीवरी खर्च में काफी ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। कुछ उत्पादों की कीमतें तो इसलिए भी बढ़ी हैं क्योंकि इनके निर्माण में पेट्रोलियम पदार्थों का सीधा इस्तेमाल होता है, मसलन रासायनिक खाद, पेंट, रबर, सिंथेटिक धागे आदि। रासायनिक खादों की कीमतों में बढ़ोतरी से खाद्य पदार्थों की कीमतों में भी इजाफा हुआ है जिसका असर दुनियाभर में हो रहा है।

3. समुद्री परिवहन की लागत में बढ़ोतरी

          अधिकतर वैश्विक व्यापार समुद्री रास्तों से होता है। बीते दिनों समुद्री रास्तों से होने वाली माल ढुलाई की लागत में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। यहां चीन की भी प्रमुख भूमिका रही है, क्योंकि दरों को बढ़ाने के लिए उसने 50 फीसदी शिपिंग जहाजों को वापस ले लिया है। इससे बाल्टिक ड्राई इंडेक्स में पिछले एक साल में 62.30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यह इंडेक्स समुद्री शिपिंग मार्गों के परिवहन की लागत से संबंधित है।

4. औद्योगिकी धातुओं में भी आई तेजी

             एल्युमीनियम, कॉपर, जिंक, स्टील, निकल कोबाल्ट आदि की कीमतों में भी काफी तेजी आई है। इसका सीधा असर कंज्यूमर ड्यूरेबल्स प्रोडक्ट्स जैसे टीवी, एसी, फ्रिज, वाशिंग मशीन आदि की कीमतों पर हो रहा है। चीन में बिजली उत्पादन और कामगारों में कमी की वजह से इन धातुओं का उत्पादन प्रभावित हुआ है। इन धातुओं की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से इलेक्ट्रिक वाहन सेगमेंट पर भी काफी असर पड़ा है।

5. जलवायु परिवर्तन का कृषि पर असर

        एग्री कमोडिटीज की कीमतों में तेजी की वजह विश्व के कई प्रमुख उत्पादक देशों में मैजलवायु परिवर्तन यानी मौसम का प्रतिकूल होना भी है। उदाहरण के तौर पर चीनी की कीमतों में तेजी की वजह ब्राजील के गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में मौसम के प्रतिकूल रहने के कारण उत्पादन में आई भारी गिरावट है। अन्य एग्री कमोडिटीज की कीमतों में भी तेजी की एक प्रमुख वजह प्रतिकूल मौसम है जिससे वैश्विक स्तर पर उत्पादन में कमी आई है।

27% बढ़ी महंगाई एक साल में दुनिया में

14%थोक महंगाई हुई भारत में इस साल

अर्थव्यवस्था से लेकर आम लोगों तक कैसा होगा असर?

    1. जीडीपी ग्रोथ:उपभोग घटने से आएगी गिरावट

महंगाई का सबसे ज्यादा असर विकासशील और गरीब देशों पर हो रहा है। अगर महंगाई अगर और बढ़ती है तो लोगों की क्रय शक्ति पर बुरा असर होगा। परिणामस्वरूप निजी उपयोग में कमी आएगी और जीडीपी ग्रोथ प्रभावित होगी। उदाहरण के लिए भारत में वित्त वर्ष 2020-21 में महंगाई दर 6.2 फीसदी रही जिस वजह से निजी उपभोग में 9 फीसदी की गिरावट देखी गई। भारत की जीडीपी में निजी उपयोग की हिस्सेदारी करीब 60 फीसदी है।

2.खाद्य सुरक्षा:1.8 अरब लोग स्वस्थ आहार से वंचित

महंगाई की वजह से खासकर गरीब व निम्र मध्यम वर्गीय लोगों की जिंदगी और भी दूभर होगी। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन की एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि लंबे समय तक महामारी और बढ़ती कीमतें एशिया में लाखों लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा को प्रभावित कर रही हैं। इस वजह से 1.8 अरब लोगों के पास स्वस्थ आहार नहीं हैं। अगर पूरी दुनिया की बात करें तो रिपोर्ट के अनुसार हर 4 में से 3 लोग महंगाई के असर को महसूस कर रहे हैं।

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